बुधवार, 11 मार्च 2009

हीरादे

हीरादे की कथा एक अनूठी कथा है, शायद सुनी भी नहीं होगी, हीरादे जालोर की एक साधारण महिला थी, उसके पति का नाम था वीका,संवत १३६८ की वैशाख मास की चतुर्थी तिथि रात का समय वीका खिलजी अल्लाउदीन की सेना से मिल गया. रात के समय दरवाजे खोल दिए. उस वीर महिला ने अपने पति का सर काट दिया. उस समय उसके उद्गार सुनने लायक है .जब वीका अल्लाउदीन के सेनापति से मिली भेट लेकर अपनी पत्नी के पास पहुंचा तो वह कहती है कि
हिरादेवी भणइ चण्डाल सूं मुख देखाड्यूं काळ
अर्थात् विधाता आज कैसा दिन दिखाया है कि इस चण्डाल का मुंह देखना पड़ रहा है। हीरादेवी चण्डाल शब्द का प्रयोग वीका दहिया के लिए करती है। वीका के दरवाजा खोलने के कारण शत्रु सेना पिछवाड़े के रास्ते से दुर्ग में प्रवेश कर गई थी। इस राजा ने तेरा पोषण किया तुझे बड़ा किया उसको तूंने केवल अपने स्वार्थ के लिए धोखा दिया और तलवार निकालकर हीरा दे ने वीका का सिर धड़ से अलग कर दिया। रणचण्डी के रूप में वीका के लहू टपकते सिर को हाथ में लेकर दूसरे हाथ में नंगी तलवार लेकर उसने दुर्गपाल द्वारा दगा करने की सूचना चौहान कान्हड़देव को दी। इतिहास में पुत्र का बलिदान करने वाली पन्नाधाय आज प्रसिद्ध है। देशभक्ति के लिए पति का सिर काटने वाली हीरा दे अग्यात है। उसको बतलाना ही आज की कहानी है।

1 टिप्पणी:

  1. हीरा दे के बलिदान को भी ज्ञान दर्पण.कॉम ,अख़बारों व Online CG Radio के कलाकारों से स्वर बद्ध करवाकर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जायेगा|
    नमन है एसी वीरांगना को |

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