बुधवार, 15 अप्रैल 2009

स्वात घाटी में तालिबान का शासन हो चुका है। अफगानिस्तान पहले से ही उसकी क्रुरता से लड़ रहा है। पाकिस्तान और अमेरिका का सांझा प्रयास तथा चीन की मौन सहमति तालिबान को कदमों को धीरे-धीरे भारत की तरफ बढ़ा रही है। भारत वर्ष में अभी जो हालात बने हुये है जिस ढंग की मानसिकता इस देष के नेताओं की अल्पसंख्यकवाद पर बनी हुई है। उसे देखते हुये तथा वोट बैंक की राजनीति को देखते हुए इस खतरे से मुकाबले के लिए हम तैयार नहीं है। जब बटाला हाऊस में मुठभेड होती है तब उसकी जांच की मांग की जाती है। इस देष में करोडों की संख्या में बंगलादेषी रह रहे है। जिनको तालिबान का अग्रदूत कहा जाये तो गलत नहीं होगा। पूरे पूर्वांचल पर इनकी नजर है। यह बात मुजिबुर रेहमान जैसा व्यक्ति भी कह चुका है। पूरे पूर्वांचल में बंगलादेषियों की संख्या इस कदर बढ चुकी है कि वहां का पहले से रहने वाला निवासी अपने आप में अल्पसंख्यक बन गया है। यह स्थिति कष्मीर घाटी की है। जहां के सारे पण्डित आज भी दर-दर की ठोकरे खा रहे है। मन्दिर तोडे जा रहे है और उस पर देष के शासनकर्ता मल्हार गा रहे है। केरल में खाडी देषों के पैसों से जो कुछ हो रहा है वह चिन्ता का विषय है। भारत का पूरा का पूरा समुद्री किनारे का इलाका सम्प्रदाय विषेष के लोगों के कब्जे में है। वहां उनकी अघोषित हुकुकत चलती है। पुलिस प्रषासन, नेता सभी अपनी-अपनी सुविधा के लिए वोट बैंक की राजनीति के चलते चुप रहते है। कन्याकुमारी से लेकर गुजरात के तटों तक कन्याकुमारी से लेकर बंगाल के तटों तक आप जहंा जायेंगे आपको एक पंथ विषेष के लोग मिलते जायेंगे। पूजा पद्धती राष्ट्र के प्रति भावना में बदलाव लाती है। यह अब विवाद का विषय नहीं रहा है जो लोग इस पर आपत्ति करते है। वे झुठ बोलते है। आजादी के बाद हर क्षैत्र में एक समुदाय विषेष की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। हिन्दू कम हुआ है। जहां हिन्दू कम हुआ है वह भाग भारत से अलग होने की मांग करने लगा है। कष्मीर घाटी इसका उदाहरण है। कांगे्रेस ने वहंा उमर अब्दुला की सरकार को समर्थन देकर 1953 से पहले की वह स्थिति ले आयी है जहां पर स्वतंत्र कष्मीर का राग अलापा जाता था। इसी बात पर एक देष दो निषान, एक देष दो विधान नहीं चलेगे-नहीं चलेगे। देष के एक प्रख्यात चिंतक षिक्षाषास्त्री तथा राजनेता डाॅ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान हुआ था।

इन सब घटनाओं पर कुछ विचार करे।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी जानकारी ,मधुसूदन जी, हालांकि टाइपिन्ग के कारण पढने में कठिनाई हुई. क्या ये महर्षि जाबालि की भूमि है? वीरम देव के वारे में कुछ-कुछ पढा तो था,अब बहुत जानने को मिला।

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  2. सादर प्रणाम आदरजोग श्री व्यास जी
    आपके बारे में जितना भी कहू कम होगा, आपकी इस पुनीत भावना को मैं नमन करता हूँ..एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक जानकारी आपने दी है, मैं आपकी बातों से पूर्णतः सहमत हूँ वीरमदेव के बारे में थोडा बहुत मैंने भी पढ़ा है,,और समग्र इतिहास पढ़ कर बहुत सुखद अनुभूति हुई . सच में इतिहासकारों द्वारा कुछ कमियाँ रखी गई हैं,,, आपके इस प्रयास को नमन !साधुवाद !!

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